कृष्ण भगवान की आरती लिखित में | Shri Krishna Aarti Lyrics in Hindi

Shri Krishna Aarti Lyrics in Hindi: भारतीय संस्कृति में भगवान कृष्ण को सबसे प्रिय और मनोहर देवता माना जाता है। उनकी लीलाएं, कथाएं और उनके धार्मिक ग्रंथों में दिए गए उपदेश बहुत ज्ञानवर्धक है, जिन्हे सभी लोगो को अपने जीवन में उतरना चाहिए।

भगवान कृष्ण की आरती गाते समय भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ उनकी पूजा करते है और उनके चरणों में अपना मन लगाते है। इस आरती में भगवान कृष्ण के विभिन्न रूपों की महिमा का वर्णन किया गया है। श्री राम चालीसा हिंदी लिरिक्स

Shri Krishna Aarti in Hindi

Shri Krishna Aarti Lyrics in Hindi
Shri Krishna Aarti Lyrics in Hindi

ओउम् जय श्री कृष्ण हरे,
प्रभु जय श्री कृष्ण हरे।

भक्तन के दुख सारे पर में दूर करे।

परमानन्द मुरारी मोहन गिरधारी।

जय रस रास बिहारी जय जय गिरधारी।

कर कंकन कटि सोहत कानन में बाला।

मोर मुकुट पीताम्बर सोहे बनमाला।

shri krishna aarti in hindi
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दीन सुदामा तारे दरिद्रों के दुख टारे।

गज के फन्द छुड़ाए भव सागर तारे।

हिरण्यकश्यप संहारे नरहरी रूप धरे।

पाहन से प्रभु प्रगटे जम के बीच परे।

गंगा माता की आरती लिखित में

केशी कंस विदारे नल कूबर तारे।

दामोदर छवि सुन्दर भगतन के प्यारे।

काली नाग नथैया नटवर छवि सोहे।

फन फन नाचा करते नागन मन मोहे।

shri krishna aarti Lyrics
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राज्य उग्रसेन पाये माता शोक हरे।

द्रुपद सुता पत राखी करूणा लाज भरे।

ओउम् जय श्री कृष्ण हरे।

इस तरह से भगवान कृष्ण की आरती हमें जीवन में प्रेम, भक्ति और समर्पण का मार्ग दिखाती है। यह हमे भगवान कृष्ण के दिव्य गुणों को अपनाने और अपने जीवन को सार्थक बनाने को प्रेरणा देती है।

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FAQ

घर पर सुबह पूजा करने का सही समय क्या है?

वैसे तो सनातन धर्म में सुबह 5 बजे से 6 बजे तक ब्रह्म मुहूर्त में ही पूजा करनी चाहिए। और शाम को सूर्यास्त के एक घंटे पहले और एक घंटे बाद तक का समय ही पूजा के लिए सही माना जाता है।

कृष्ण को कौन सी मिठाई चढ़ाएं?

भगवान श्री कृष्ण को पेड़ा बहुत ही प्रिय है। भगवान कृष्ण को ताजा मावा, दूध, चीनी और घी से बने पेड़े बहुत पसंद है।

भगवान श्री कृष्ण की पूजा कैसे करें?

भगवान श्री कृष्ण के जन्म के बाद हमे उनका कच्चे दूध, घी, शहद, गंगाजल, आदि चीजों से बने पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए। फिर आपको लड्डू गोपाल को साफ कपड़े से साफ करके उनका श्रृंगार करना है और उनकी आरती करनी है।

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